PF ट्रस्ट्स के लिए EPFO की बड़ी राहत: 6 महीने की ‘वन-टाइम एमनेस्टी’ विंडो खुली, कागजी खामियों को दूर करने का 28 दिसंबर तक मौका
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
एकमुश्त माफी योजना: EPFO ने उन निजी PF ट्रस्टों को कानूनी दर्जा नियमित कराने के लिए ‘एमनेस्टी स्कीम 2026’ की शुरुआत की है, जिनके पास औपचारिक छूट का आदेश नहीं था।
28 दिसंबर 2026 तक मौका: यह विशेष विंडो अधिसूचना की तारीख से 6 महीने तक खुली रहेगी, जिसके तहत ट्रस्ट पिछली तारीखों (Retrospective) से अपना स्टेटस नियमित करा सकते हैं।
शर्तों में भारी छूट: न्यूनतम कर्मचारियों की संख्या, फंड साइज और तीन साल के पिछले अनुपालन जैसी अनिवार्य शर्तों में ढील दी गई है।
ICAI और IT विभाग से संपर्क: योग्य ट्रस्टों की पहचान और सहायता के लिए EPFO ने चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की शीर्ष संस्था ICAI और आयकर विभाग से हाथ मिलाया है।
नई दिल्ली:
निजी भविष्य निधि (PF) ट्रस्ट संचालित करने वाले नियोक्ताओं और कंपनियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) एक बड़ी राहत लेकर आया है। कई निजी संस्थानों के पास आयकर विभाग (Income Tax) से मान्यता तो है, लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि अधिनियम के तहत औपचारिक ‘छूट आदेश’ (Formal Exemption Order) का अभाव था।
इस कागजी खामी और कानूनी असमंजस को हमेशा के लिए समाप्त करने के उद्देश्य से EPFO ने ‘एमनेस्टी स्कीम 2026‘ (Amnesty Scheme) शुरू की है। यह एकमुश्त राहत विंडो 28 दिसंबर 2026 तक खुली रहेगी, जिसके जरिए पात्र ट्रस्ट अपने संचालन को वैध और नियमित (Regularise) करा सकते हैं।
क्या है यह समस्या और किसे मिलेगा इसका लाभ?
देश में कई बड़े कॉर्पोरेट्स और संस्थान अपने कर्मचारियों के पीएफ फंड का प्रबंधन खुद के निजी ट्रस्ट के जरिए करते हैं। नियमतः इसके लिए दोहरी मंजूरी की आवश्यकता होती है:
आयकर अधिनियम 1961 के तहत मान्यता।
EPF अधिनियम 1952 की धारा 17 अथवा सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 (CoSS) की धारा 143 के तहत सरकार से औपचारिक छूट।
अक्सर देखा गया कि कई ट्रस्टों को आयकर विभाग से मान्यता तो मिल गई, लेकिन वे श्रम मंत्रालय या EPFO से वैधानिक छूट आदेश हासिल नहीं कर पाए। यह एमनेस्टी स्कीम विशेष रूप से उन्हीं ट्रस्टों के लिए एक ‘ट्रांजिशनल मेजर’ (अंतरिम व्यवस्था) के तौर पर लाई गई है।
पुरानी गलतियों पर कानूनी पचड़े से मुक्ति (Retrospective Relief)
इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि ट्रस्ट पिछली तारीख से अपनी छूट को नियमित करवा सकते हैं। इसके तहत मिलने वाले मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
मानकों में ढील: सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत निर्धारित न्यूनतम कर्मचारियों की संख्या (Headcount), कुल फंड का आकार (Corpus Size) और 3 साल के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड की शर्तों से छूट दी गई है।
कानूनी मामलों से राहत: यदि ट्रस्ट ने अपने अंशधारकों को EPFO के तय न्यूनतम रिटर्न के बराबर या उससे अधिक ब्याज व अंशदान दिया है, तो पुराने बकाए, ब्याज या जुर्माने (Damages) से जुड़े लंबित कानूनी विवाद और असेसमेंट रद्द (Abate) माने जाएंगे।
भविष्य की राह चुनने की आजादी: नियमितीकरण के बाद कंपनी यह निर्णय ले सकती है कि वह आगे भी निजी छूट प्राप्त (Exempted) ट्रस्ट के रूप में काम जारी रखना चाहती है या फिर सीधे EPFO के सिस्टम (Unexempted) में शिफ्ट होना चाहती है।
पात्र ट्रस्टों तक पहुंचने के लिए EPFO की विशेष मुहिम
EPFO केवल आवेदन का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि खुद पात्र ट्रस्टों तक पहुंच रहा है:
ICAI की मदद: चूंकि चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) कंपनियों के वैधानिक और टैक्स ऑडिट करते हैं, इसलिए EPFO ने इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से संपर्क किया है ताकि वे अपने सदस्यों के जरिए ऐसे ट्रस्टों को चिन्हित कर सकें।
आयकर विभाग से समन्वय: श्रम मंत्रालय ने आयकर विभाग से उन सभी ट्रस्टों का डेटा मांगा है जिन्हें आईटी एक्ट के तहत मान्यता मिली हुई है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में केवल उन्हीं ट्रस्टों को टैक्स छूट मिले जिनके पास EPFO का वैध आदेश हो।
आवेदन की प्रक्रिया और अंतिम तिथि
पात्र संस्थान 11 जुलाई 2026 को जारी EPFO के आधिकारिक सर्कुलर में दी गई प्रक्रिया के तहत जरूरी दस्तावेजों के साथ संबंधित जोनल/रीजनल पीएफ कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं।
ध्यान रहे: इस वन-टाइम एमनेस्टी विंडो का लाभ उठाने की अंतिम तारीख 28 दिसंबर 2026 है। इसके बाद बिना वैध आदेश के चल रहे निजी ट्रस्टों की आयकर मान्यता रद्द की जा सकती है और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।











