ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड: 26 साल बाद दोषी दारा सिंह की समय पूर्व रिहाई पर सस्पेंस, सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी निगाहें
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
रिहाई की अर्जी: ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों को जिंदा जलाने के दोषी दारा सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में समय पूर्व रिहाई (Remission) की गुहार लगाई है।
26 साल से जेल में: दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल साल 2000 से जेल में बंद है और उम्रकैद की सजा काट रहा है।
कोर्ट का अल्टीमेटम: सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को साफ निर्देश दिया था कि अगर सेंटेंस रिव्यू बोर्ड ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो अदालत खुद इस पर निर्णय लेगी।
25 साल पुराना खौफनाक कांड: जनवरी 1999 में क्योंझर के मनोहरपुर में स्टेन्स और उनके दो बच्चों की जीप को आग के हवाले कर दिया गया था।
नई दिल्ली:
भारत में धार्मिक हिंसा के सबसे भयावह और चर्चित मामलों में शुमार 1999 के ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड की गूंज ढाई दशक बाद एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत में सुनाई दे रही है। ऑस्ट्रेलियाई ईसाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की जिंदा जलाकर हत्या करने का मुख्य दोषी दारा सिंह (रवींद्र कुमार पाल) अब जेल की सलाखों से बाहर आने की कानूनी कोशिशों में जुटा है।
दारा सिंह ने अपनी उम्र, अच्छे आचरण और 26 साल से अधिक समय तक जेल में रहने का हवाला देते हुए समय पूर्व रिहाई (Premature Release) की याचिका दाखिल की है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद सबकी निगाहें ओडिशा सरकार और अदालत के फैसले पर टिकी हुई हैं।
दारा सिंह की दलील: ‘पछतावा है, अब समाज सेवा का मौका मिले’
सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी अर्जी में 60 वर्ष से अधिक उम्र के हो चुके दारा सिंह ने ओडिशा सरकार की प्रीमैच्योर रिलीज पॉलिसी (2022) और सुधारात्मक न्याय (Reformative Justice) के सिद्धांतों का हवाला दिया है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि वह पिछले 26 वर्षों से बिना किसी पैरोल के जेल में बंद है और इस दौरान जेल में उसका आचरण अच्छा रहा है।
उसने दावा किया कि उसे दो दशक पहले किए गए अपने अपराध पर गहरा पछतावा है और वह अब समाज सेवा के जरिए समाज को कुछ लौटाना चाहता है।
याचिका में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी ए.जी. पेरारिवलन को मिली रिहाई का भी उदाहरण दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का ओडिशा सरकार को सख्त संदेश
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने इस मामले में राज्य सरकार की तरफ से हो रही देरी पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने ओडिशा के सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (Sentence Review Board) से पूछा था कि रिहाई की फाइल पर फैसला लेने में इतनी देर क्यों की जा रही है।
पिछली सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए स्पष्ट चेताया था कि सरकार अनिश्चितता की स्थिति न बनाए रखे और जल्द फैसला ले, वरना अदालत खुद इस अर्जी पर उचित आदेश पारित करेगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी समीक्षा बोर्ड ने कई बार दारा सिंह की समय पूर्व रिहाई की मांग को खारिज किया है।
क्या था 22 जनवरी 1999 का मनोहरपुर कांड?
ग्राहम स्टेन्स ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड के रहने वाले थे और वे पिछले तीन दशकों से ओडिशा के मयूरभंज जिले में कुष्ठ रोगियों की सेवा व मानवीय कार्यों में जुटे हुए थे।
22-23 जनवरी 1999 की रात: स्टेन्स अपने दो बेटों—फिलिप (10 वर्ष) और टिमोथी (6 वर्ष)—के साथ क्योंझर के सुदूर गांव मनोहरपुर में एक सभा में शामिल होने के बाद अपनी स्टेशन वैगन (जीप) में सो रहे थे।
भीड़ का हमला: आरोप था कि दारा सिंह के नेतृत्व में करीब 60 से 70 लोगों की उग्र भीड़ ने उनकी जीप को चारों तरफ से घेर लिया। भीड़ ने धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए गाड़ी पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी और अंदर फंसे पिता-पुत्रों को बाहर नहीं निकलने दिया। तीनों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई।
जांच रिपोर्ट: मामले की जांच के लिए गठित जस्टिस डी.पी. वाधवा आयोग ने पाया था कि ग्राहम स्टेन्स द्वारा जबरन धर्मांतरण कराए जाने का कोई पुख्ता सबूत नहीं था, हालांकि इलाके में सांप्रदायिक तनाव पहले से बना हुआ था।
फांसी से उम्रकैद तक का कानूनी सफर
ट्रायल कोर्ट (2003): विशेष सीबीआई अदालत ने दारा सिंह को मौत की सजा (फांसी) सुनाई थी और अन्य 12 आरोपियों को उम्रकैद दी थी।
उड़ीसा हाईकोर्ट (2005): हाईकोर्ट ने इस मामले को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में न मानते हुए दारा सिंह की फांसी को उम्रकैद में बदल दिया था।
सुप्रीम कोर्ट (2011): शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए दारा सिंह की उम्रकैद की सजा पर अंतिम मुहर लगाई थी।
उल्लेखनीय है कि इस मामले में सह-आरोपी रहे महेंद्र हेम्ब्रम को अप्रैल 2025 में अच्छे आचरण के आधार पर रिहा कर दिया गया था, जिसके बाद दारा सिंह की रिहाई की मांग ने भी तूल पकड़ा है।
निष्कर्ष
ग्राहम स्टेन्स की हत्या ने देश-विदेश को हिलाकर रख दिया था। हालांकि स्टेन्स की पत्नी ग्लैडिस स्टेन्स ने अपने पति और दोनों बेटों के कातिलों को सार्वजनिक तौर पर माफ कर दिया था और वे लंबे समय तक भारत में ही रहकर सेवा कार्य करती रहीं। लेकिन दारा सिंह की संभावित रिहाई की खबरों ने अल्पसंख्यकों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के बीच 26 साल पुराने जख्मों और सुरक्षा चिंताओं को फिर से हरा कर दिया है।











