Climate Dynamics Conference: पीएम मोदी ने किया अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन, बोले- भारत दुनिया को दे रहा जलवायु समाधान Onion Price Hike: प्याज ने फिर निकाले आंसू, एक साल में 94% महंगी! सरकार का 35 रुपये वाला बफर स्टॉक भी फेल Supreme Court Contempt Notice Education Secretary: 14 साल से कम उम्र के बच्चों की धार्मिक शिक्षा नियमन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्रीय शिक्षा सचिव टी.के. अनिल कुमार को अवमानना नोटिस जारी Mirzapur Movie Box Office Collection Day 10: कालीन भैया का जलवा बरकरार, 10वें दिन कमाए ₹13.25 करोड़; ₹200 करोड़ क्लब के बेहद करीब पहुंची फिल्म UCC Implementation Before 2029 Amit Shah: 2029 से पहले 21 एनडीए शासित राज्यों में लागू होगा यूसीसी, अमित शाह ने पीएम मोदी के जन्मदिन पर ‘सेवा संकल्प’ अभियान का किया एलान BSF Rescues Bangladeshi Nationals Ganga River: उफनती गंगा में डूब रहे थे तीन बांग्लादेशी, बीएसएफ जवानों ने देवदूत बनकर बचाई जान; मालदा सीमा पर मानवीय मिसाल

नेपाल में जलप्रलय के बीच ‘जिंदगी का झूला’: उफनती त्रिशूली नदी पर रस्सियों के सहारे रेस्क्यू, बिछड़ों को मिला रहे कामचलाऊ पुल

नेपाल में जलप्रलय

नेपाल में जलप्रलय के बीच ‘जिंदगी का झूला’: उफनती त्रिशूली नदी पर रस्सियों के सहारे रेस्क्यू, बिछड़ों को मिला रहे कामचलाऊ पुल

प्रमुख बिंदु (Key Highlights):

  • आपदा में हिम्मत: त्रिशूली नदी के उफान में पक्के पुल बहने के बाद स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों ने रस्सियों और केबल्स से तैयार किए अस्थायी रोपवे।

  • हफ्ते भर बाद मिली राहत: संपर्क कटने से भूख-प्यास से जूझ रहे सुदूर गांवों तक राशन और जरूरी दवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

  • अपनों से मिलने की उम्मीद: खतरनाक नदी के आर-पार बने इन रास्तों से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सुरक्षित निकाला जा रहा है।

  • जमीनी स्तर पर एकजुटता: प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिकों का जज्बा बना राहत अभियान की सबसे बड़ी ताकत।

काठमांडू:

नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद कई पहाड़ी इलाकों का जमीनी संपर्क देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह टूटा हुआ है। सड़कें बह चुकी हैं और विशालकाय कंक्रीट के पुल उफनती नदियों में समा गए हैं।

इस घोर विपत्ति और तबाही के मंजर के बीच इंसानी हौसले और एकजुटता की एक प्रेरक तस्वीर सामने आई है। उफनती त्रिशूली नदी के ऊपर रस्सियों और मजबूत केबल वायर की मदद से अस्थायी रास्ते तैयार कर जिंदगी बचाने की जंग लड़ी जा रही है।

उफनती नदी और रस्सियों का सहारा

त्रिशूली नदी का बहाव इस समय बेहद तेज और जानलेवा है, लेकिन आपदा प्रभावितों को बचाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों, युवा स्वयंसेवकों और बचाव दलों ने मिलकर अनोखा उपाय निकाला है। जहां कुछ दिन पहले तक पक्के सस्पेंशन पुल हुआ करते थे, वहां अब स्टील केबल और रस्सियों के सहारे कामचलाऊ रोपवे (Rope Bridge) स्थापित किए गए हैं।

सुरक्षा रस्सियों (हार्नेस) के जरिए सबसे पहले असहाय बुजुर्गों, महिलाओं और नन्हे बच्चों को एक किनारे से दूसरे सुरक्षित किनारे पर पहुंचाया जा रहा है।

कटे हुए गांवों के लिए बने ‘लाइफलाइन’

बाढ़ के कारण नेपाल के कई सुदूर पहाड़ी गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ गए थे, जहां न तो गाड़ियां जा सकती हैं और न ही भारी मशीनरी पहुंच पा रही है। ऐसे दुर्गम इलाकों के लिए ये रस्सी के पुल संजीवनी साबित हो रहे हैं:

  • राहत सामग्री का परिवहन: इन तारों और रस्सियों के जरिए राहत पैकेट, पीने का पानी, सूखा राशन और जीवनरक्षक दवाएं नदी पार गांवों तक भेजी जा रही हैं।

  • बिछड़ों का मिलन: सैलाब के दिन कई परिवार अलग-थलग हो गए थे—माता-पिता एक छोर पर फंसे थे तो बच्चे दूसरी ओर। इन अस्थायी पुलों के शुरू होने के बाद पिछले सात दिनों से बिछड़े लोग आखिरकार एक-दूसरे से गले मिल पा रहे हैं।

जब संकट में खुद नागरिक बने ‘देवदूत’

तबाही के शुरुआती दिनों में जब सड़कें कटने के कारण राहत दल मौके पर नहीं पहुंच पा रहे थे, तब स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों ने खुद कमान संभाली। नेपाल के ग्राउंड जीरो से आ रही तस्वीरें दिखाती हैं कि प्रकृति के भीषण प्रकोप के आगे जब संसाधन कम पड़ गए, तब इंसानी जज्बे ने मौत के मुंह से जिंदगियां खींच निकालीं।

त्रिशूली के ऊपर झूलते ये रस्सियों के पुल महज एक रास्ता नहीं हैं, बल्कि यह उस उम्मीद का प्रतीक हैं जो नेपाल को इस जलप्रलय के जख्मों से उबारने में जुटी है।

Leave a Comment

और पढ़ें