SCO समिट: पीएम मोदी ने जहां सीमा पार आतंकवाद पर घेरा, वहीं संगठन ने लाहौर को सौंपी ‘सांस्कृतिक राजधानी’ की कमान
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
विरोधाभासी तस्वीर: एक तरफ भारत ने आतंक के पनाहगाहों पर कड़ा प्रहार किया, वहीं दूसरी तरफ एससीओ ने लाहौर को वर्ष 2026-27 के लिए पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी घोषित किया।
बिश्केक में ऐलान: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित एससीओ राष्ट्रप्रमुखों की 26वीं बैठक में यह औपचारिक घोषणा की गई।
पाकिस्तान को मिली अध्यक्षता: रोटेशन प्रणाली के तहत पाकिस्तान इस वर्ष शंघाई सहयोग संगठन की अध्यक्षता संभालने जा रहा है।
भारत का वाराणसी भी रह चुका है लिस्ट में: साल 2022-23 में भारत की प्राचीन नगरी काशी (वाराणसी) को एससीओ की पहली सांस्कृतिक राजधानी बनने का गौरव प्राप्त हुआ था।
बिश्केक/नई दिल्ली:
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच से एक दिलचस्प कूटनीतिक विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन के दौरान आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए दो टूक कहा कि “आतंकवाद किसी के लिए रणनीतिक संपत्ति (Strategic Asset) नहीं हो सकता”, वहीं दूसरी तरफ इसी बहुपक्षीय मंच ने पाकिस्तान के ऐतिहासिक शहर लाहौर को वर्ष 2026-27 के लिए अपनी ‘पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी’ (Tourism and Cultural Capital) का दर्जा दे दिया।
यह फैसला किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित एससीओ के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद (Council of Heads of State) की 26वीं शिखर बैठक में लिया गया, जिसमें पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद रहे।
क्यों मिला लाहौर को यह दर्जा?
एससीओ में सांस्कृतिक राजधानी घोषित करने का नियम किसी राजनीतिक सहमति के बजाय संगठन की रोटेशन व्यवस्था और आगामी अध्यक्षता पर आधारित होता है:
रोटेशनल चेयरमैनशिप: जिस सदस्य देश के पास संगठन की कमान आने वाली होती है, उसके किसी प्रमुख शहर को पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए यह खिताब दिया जाता है।
पाकिस्तान की बारी: पाकिस्तान इस वर्ष एससीओ की अध्यक्षता संभालने जा रहा है। इसी सिलसिले में उसके ऐतिहासिक शहर लाहौर को यह ताज सौंपा गया है।
इस निर्णय की प्रारंभिक रूपरेखा इसी साल अप्रैल में बिश्केक में हुई एससीओ पर्यटन मंत्रियों की बैठक में तय कर ली गई थी।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपनी आगामी अध्यक्षता के लिए मुख्य थीम ‘विजन को एक्शन में बदलना: कनेक्टिविटी, इनोवेशन और साझा समृद्धि’ तय की है।
2022 से शुरू हुई थी यह परंपरा, काशी को मिला था पहला सम्मान
सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों, जन-जन के संपर्क (People-to-People Contact) और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से साल 2022 में इस वार्षिक पहल की शुरुआत की गई थी।
अब तक इन शहरों को मिल चुका है यह सम्मान:
वाराणसी, भारत (2022-23): एससीओ की सबसे पहली सांस्कृतिक राजधानी।
अल्माटी, कजाकिस्तान (2023-24)
किंगदाओ, चीन (2024-25)
चोलपोन-अता, किर्गिस्तान (2025-26)
लाहौर, पाकिस्तान (2026-27): ताजा घोषणा के तहत नामित शहर।
भारत का सख्त संदेश बनाम कूटनीतिक औपचारिकता
शिखर सम्मेलन के दौरान भारत ने बिना लाग-लपेट के क्षेत्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के दोहरे मापदंडों पर कड़ा प्रहार किया। भारतीय नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि जब तक सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक कनेक्टिविटी की बातें अधूरी हैं।
हालांकि, एससीओ का चार्टर द्विपक्षीय विवादों को संगठन के औपचारिक कामकाज और रोटेशनल प्रक्रियाओं पर हावी नहीं होने देता। यही कारण है कि भारतीय कूटनीतिक दबाव के बावजूद पाकिस्तान को तयशुदा नियमों के तहत अध्यक्षता और लाहौर को सांस्कृतिक राजधानी का खिताब दोनों हासिल हो गए।











