तमिलनाडु की सियासत में इन दिनों ‘प्रधानमंत्री पद’ को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। टीवीके (तमिलगा वेत्री कझगम) पार्टी के मंत्रियों द्वारा अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय को भारत के ‘भविष्य का प्रधानमंत्री’ बताए जाने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। टीवीके नेताओं के इस बयान पर उनकी ही गठबंधन सहयोगी कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है।
विधानसभा से उठी ‘भावी पीएम’ की मांग
इस सियासी विवाद की शुरुआत 18 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में हुई, जब राज्य सरकार में मंत्री सरथकुमार ने जोसेफ विजय की तारीफ करते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जो नेता बिना घड़ी देखे दिन-रात जनता के लिए पसीना बहाते हैं, वही आने वाले वक्त में देश की कमान संभालेंगे और भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
इसके बाद से टीवीके के कई अन्य नेताओं और मंत्रियों ने भी विजय को राष्ट्रीय स्तर के नेता और संभावित पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है।
कांग्रेस का पलटवार: ‘फैन क्लब वाली मानसिकता से बाहर आएं’
टीवीके मंत्रियों के इन दावों पर कांग्रेस पार्टी ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी (TNCC) के अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने इस बयानबाजी पर तंज कसते हुए कहा कि:
“टीवीके के नेता अभी भी सिनेमाई फैन क्लब वाली मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं। राजनीति को जमीनी हकीकत से देखना चाहिए, न कि सिर्फ प्रशंसकों की तरह।”
कांग्रेस के भीतर इस बात को लेकर असहजता साफ देखी जा रही है, क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस राहुल गांधी को मुख्य चेहरे के रूप में देखती है।
कैसे बनी थी TVK-कांग्रेस की सरकार?
तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प मोड़ पर पहुंचे थे:
बहुमत की कमी: चुनाव नतीजों के बाद विजय की पार्टी TVK अपने दम पर स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर पाई थी।
कांग्रेस का समर्थन: संकट के समय कांग्रेस ने आगे आकर अपने 5 विधायकों का समर्थन TVK को दिया, जिससे सरकार बनाने का रास्ता साफ हुआ।
कैबिनेट में हिस्सेदारी: 10 मई को जोसेफ विजय के शपथ ग्रहण समारोह में खुद राहुल गांधी शामिल हुए थे, जिसके बाद राज्य मंत्रिमंडल में कांग्रेस को 2 मंत्री पद भी मिले।
उस वक्त कांग्रेस नेतृत्व ने साफ किया था कि दोनों दलों का यह गठबंधन केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगामी स्थानीय निकाय और लोकसभा चुनावों में भी जारी रहेगा।
गठबंधन के भविष्य पर खड़े हो रहे सवाल
हालांकि, अब जिस तरह से टीवीके के नेता विजय को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं, उससे गठबंधन के भीतर अविश्वास और मतभेद के संकेत मिलने लगे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह बयानबाजी जारी रही, तो आने वाले राष्ट्रीय चुनावों में TVK और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर तनाव और बढ़ सकता है।











