नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर युवाओं के उग्र विरोध के बाद अब देश भर के प्राइमरी और सेकेंडरी स्कूलों की बदहाली राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गई है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा शुरू किए गए ‘स्कूल ठीक करो अभियान‘ ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की खस्ताहाली को सीधे जनता और हुक्मरानों के सामने लाकर खड़ा कर दिया है। कॉलेज के छात्रों के बाद अब प्राथमिक स्कूलों के बच्चे भी बुनियादी हक और बेहतर सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरने लगे हैं।
सोशल ऑडिट से खुली सिस्टम की पोल
CJP की ग्राउंड टीमों ने अलग-अलग राज्यों के सरकारी स्कूलों का दौरा कर वहां का ‘सोशल ऑडिट’ शुरू किया। जर्जर कक्षाएं, टूटी छतें, बदहाल शौचालय और शिक्षकों की भारी कमी से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही कई राज्य सरकारों के शिक्षा मॉडल सवालों के घेरे में आ गए।
इस अभियान के बढ़ते असर को देखते हुए राजस्थान शिक्षा विभाग ने स्कूलों में बाहरी लोगों व मीडिया की एंट्री, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग पर सख्त पाबंदियां लागू कर दीं। वहीं 21 अगस्त को राजस्थान में निरीक्षण के दौरान टीम और स्थानीय लोगों के बीच तीखी नोकझोंक व टकराव की स्थिति भी देखने को मिली।
यूपी से लेकर महाराष्ट्र तक दिखा छात्रों का आक्रोश
सरकारी स्कूलों की दुर्दशा को लेकर छात्र खुद भी आंदोलन की राह चुन रहे हैं:
उत्तर प्रदेश: कन्नौज में शिक्षकों की कमी के चलते छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। हमीरपुर में पक्की सड़क की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट का घेराव हुआ, जबकि उन्नाव के आवासीय विद्यालय में खराब खाने और पानी की किल्लत पर छात्रों ने मुख्य चौराहे पर चक्का जाम किया।
महाराष्ट्र: लातूर के उजानी में जिला परिषद स्कूल का जायजा लेने के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने शिक्षा मंत्री दादा भुसे के इस्तीफे की मांग की। हालांकि, इसके बाद प्रशासन ने कार्यकर्ताओं पर बिना अनुमति स्कूल में घुसने को लेकर मामला दर्ज कर दिया।
क्या शिक्षा बन रही है चुनावी राजनीति का नया केंद्र?
ग्राउंड पर बढ़ते दबाव के बाद कई राज्य सरकारों ने आनंद-फानन में स्कूलों के बुनियादी ढांचे के लिए विशेष फंड और नई योजनाओं की घोषणाएं शुरू कर दी हैं। वहीं पारंपरिक राजनीतिक दलों को भी अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि अगर बुनियादी मुद्दों को सही तरीके से उठाया जाए, तो वह राजनीति के प्राथमिक एजेंडे को बदलने की ताकत रखता है। स्कूल ठीक करो अभियान











