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Chennai Metro Advertisement Controversy: ‘गर्लफ्रेंड भले 0% ब्याज दे, हमारी FD देगी 14.4%’, चेन्नई मेट्रो के विज्ञापन पर भड़कीं महिला सांसद; तमिलनाडु में सियासी बवाल

Chennai Metro Advertisement Controversy THECOS FD Poster DMK MP

Chennai Metro Advertisement Controversy: ‘गर्लफ्रेंड भले 0% ब्याज दे, हमारी FD देगी 14.4%’, चेन्नई मेट्रो के विज्ञापन पर भड़कीं महिला सांसद; तमिलनाडु में सियासी बवाल

प्रमुख बिंदु (Key Highlights):

  • मेट्रो कोच में लगे पोस्टर पर विवाद: चेन्नई मेट्रो के कोच के भीतर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के प्रचार के लिए लगाए गए एक विज्ञापन में ‘गर्लफ्रेंड’ की तुलना ब्याज दर से करने पर भारी राजनीतिक व सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है।

  • विवादित स्लोगन: पोस्टर पर लिखा था—“Girlfriend may give 0% interest, but our FD gives 14.40%” (गर्लफ्रेंड भले ही 0% ब्याज दे, लेकिन हमारी एफडी 14.40% रिटर्न देती है)।

  • सत्तारूढ़ DMK सांसद का विरोध: डीएमके सांसद थमिझची थंगापांडियन ने विज्ञापन को महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला और ‘ऑब्जेक्टिफिकेशन’ करार देते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की।

  • विपक्ष ने भी की कानूनी कार्रवाई की मांग: एआईएडीएमके (AIADMK) ने भी विज्ञापन की भाषा को महिलाओं का अपमान बताते हुए जिम्मेदार संस्था पर सख्त कानूनी एक्शन लेने की मांग की है।

चेन्नई:

सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो परिसरों में विज्ञापनों के चयन और सामग्री जांच के मानकों को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु की राजधानी में Chennai Metro Advertisement Controversy (चेन्नई मेट्रो विज्ञापन विवाद) ने तूल पकड़ लिया है, जहाँ एक क्रेडिट सोसाइटी द्वारा लगाए गए विज्ञापन में फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम के प्रचार के लिए महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक तुलना की गई थी।

सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की वरिष्ठ सांसद थमिझची थंगापांडियन ने इस प्रचार सामग्री पर कड़ा ऐतराज जताते हुए चेन्नई मेट्रो रेल प्रशासन से जवाबदेही तय करने और इसे फौरन हटाने का निर्देश देने की मांग की है।

विज्ञापन और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े कानूनी मानकों, भ्रामक प्रचार दिशानिर्देशों और आचार संहिता की आधिकारिक जानकारी के लिए आप Advertising Standards Council of India (ASCI) के आधिकारिक पोर्टल पर नियमावली देख सकते हैं।

क्या था पूरा विवाद और किसने लगाया था विज्ञापन?

यह विज्ञापन ‘द तिरुवल्लुवर ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन एम्प्लॉइज को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड’ (THECOS / TTCECS) द्वारा अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट योजना को बढ़ावा देने के लिए मेट्रो ट्रेनों के भीतर लगाया गया था:

  • शब्दों का हेरफेर (Wordplay): विज्ञापन में ‘इंटरेस्ट’ (दिलचस्पी/रुचि) और ‘फाइनेंशियल इंटरेस्ट’ (ब्याज) के बीच दोहरा अर्थ निकालते हुए लिखा गया कि गर्लफ्रेंड से भले शून्य प्रतिशत ब्याज/रुचि मिले, लेकिन उनकी को-ऑपरेटिव सोसाइटी 14.40% का भारी ब्याज देती है।

  • सार्वजनिक स्थान पर आपत्ति: आलोचकों का कहना है कि वित्तीय उत्पाद को बेचने के लिए हास्य या अटेंशन हासिल करने के नाम पर महिलाओं को वस्तु (Object) की तरह पेश करना और सार्वजनिक मंच पर इस तरह का संदेश प्रसारित करना पूरी तरह अस्वीकार्य है।

डीएमके सांसद ने जताई कड़ी आपत्ति

चेन्नई दक्षिण से लोकसभा सांसद थमिझची थंगापांडियन ने विज्ञापन की तस्वीर साझा करते हुए चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (CMRL) की स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए: (Chennai Metro Advertisement Controversy )

“चेन्नई मेट्रो रेल के भीतर प्रदर्शित यह विज्ञापन महिलाओं को नीचा दिखाने और उन्हें केवल एक वस्तु के रूप में चित्रित करने वाला है, जो बेहद स्तब्ध करने वाला है। सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित विज्ञापनों में महिलाओं की गरिमा और सम्मान का ध्यान रखना अनिवार्य है। मेट्रो में रोजाना लाखों लोग सफर करते हैं, ऐसे में इस तरह के संदेशों का समाज पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसे तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और भविष्य में ऐसी सामग्री की अनुमति न देने के कड़े नियम बनाए जाएं।”

विपक्ष ने भी उठाई कानूनी कार्रवाई की मांग

इस मामले पर विपक्षी दल एआईएडीएमके (AIADMK) ने भी कड़ा रुख अपनाया है:

  1. मर्यादा का उल्लंघन: एआईएडीएमके प्रवक्ता कोवई सत्यन ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह कतई नहीं है कि आप जेंडर के आधार पर किसी का अपमान करें या महिलाओं की लज्जा को ठेस पहुंचाएं।

  2. सख्त कानून के तहत मुकदमा: उन्होंने तर्क दिया कि ‘आईबॉल्स’ (लोगों का ध्यान) खींचने के नाम पर सार्वजनिक मंचों पर इस तरह की अभद्र भाषा का इस्तेमाल कानूनन दंडनीय होना चाहिए और संबंधित सोसाइटी के साथ-साथ इसे अनुमति देने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

निष्कर्ष (Chennai Metro Advertisement Controversy )

डिजिटल युग में विज्ञापनों को वायरल करने की होड़ में अक्सर नैतिक और सामाजिक सीमाएं लांघ दी जाती हैं। चेन्नई मेट्रो में लगे इस विज्ञापन ने साबित कर दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित होने वाली किसी भी सामग्री की कड़ी स्क्रीनिंग कितनी आवश्यक है। चौतरफा आलोचना के बाद अब उम्मीद की जा रही है कि मेट्रो प्रशासन विज्ञापन नीति में कड़े फिल्टर लागू करेगा ताकि महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाले संदेश दोबारा सार्वजनिक पटल पर न दिखें।

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