नीट (NEET) पेपर लीक आंदोलन से जुड़े हजारों छात्रों के लिए शीर्ष अदालत से बड़ी राहत की खबर सामने आ रही है। विरोध प्रदर्शनों के दौरान विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकियों (FIRs) को निरस्त करवाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मंगलवार को तत्काल सुनवाई करने की सहमति दे दी है। NEET Protest
सॉलिसिटर जनरल ने संविधान के अनुच्छेद 142 का दिया हवाला
सोमवार को अदालती कार्यवाही समाप्त होने के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष यह मामला उठाया।
तुषार मेहता ने अदालत को अवगत कराया कि केंद्र सरकार एक विशेष अंतरिम आवेदन (Interim Application) दायर कर रही है। उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि संविधान के अनुच्छेद 142 (Article 142) के तहत प्राप्त असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए इन युवाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को खत्म करने का आदेश दिया जाए।
‘आपसी सहमति पर कोर्ट को ऐतराज नहीं’: सुप्रीम कोर्ट
सॉलिसिटर जनरल की दलीलों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ ने कहा कि यदि सरकार और संबंधित पक्ष आपस में मिलकर इस कानूनी विवाद का समाधान निकाल रहे हैं, तो अदालत को इस प्रक्रिया में कोई आपत्ति नहीं है। इसके साथ ही पीठ ने मामले को मंगलवार की दैनिक कार्यसूची (Cause List) में सूचीबद्ध करने के निर्देश जारी कर दिए। NEET Protest
पहले राज्यों को दी गई थी केस वापसी की स्वतंत्रता
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि संबंधित राज्य सरकारें नीट प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं।
हालांकि, अदालत ने अपने पिछले आदेश में यह महत्वपूर्ण शर्त जोड़ी थी कि यह रियायत केवल शांतिपूर्ण या सामान्य प्रदर्शनकारियों तक ही सीमित रहेगी; गंभीर, हिंसक या जघन्य आपराधिक मामलों के आरोपियों को इस छूट का लाभ नहीं दिया जाएगा। केंद्र सरकार के इस नए कदम से उम्मीद बंधी है कि सामान्य छात्रों का भविष्य अदालती कार्यवाहियों से सुरक्षित रह सकेगा।











