Hanuman Ansh Box Office Success: 80 करोड़ कमाने वाली फिल्म के लिए ऐसे जुटाई गई थी भीड़, गांव में माइक लेकर घूमे थे डायरेक्टर; BTS वीडियो वायरल
प्रमुख बिंदु (Key Highlights):
बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक चमत्कार: महज 1.75 से 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर 80 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुकी है।
शूटिंग का बीटीएस वीडियो वायरल: सोशल मीडिया पर सामने आए मेकिंग वीडियो में निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी खुद लाउडस्पीकर लेकर गांव की गलियों में भीड़ जुटाने की अपील करते दिख रहे हैं।
बुजुर्गों और धोती-कुर्ते की शर्त: सीन्स को वास्तविक और प्रामाणिक बनाने के लिए मेकर्स ने गांव के बुजुर्गों से सफेद धोती-कुर्ता और महिलाओं से साड़ी पहनकर सेट पर आने का आग्रह किया था।
सेट पर सख्त आध्यात्मिक नियम: शूटिंग स्थल पर मांसाहार, शराब और अभद्र भाषा पर पूर्ण पाबंदी थी; हर दिन की शुरुआत और अंत हनुमान चालीसा के पाठ से होता था।
मुंबई/नई दिल्ली:
भारतीय सिनेमा के इतिहास में बहुत कम ऐसी फिल्में आती हैं जो बिना किसी बड़े स्टारकास्ट, भारी-भरकम पीआर और बड़े कॉर्पोरेट बैनर के बॉक्स ऑफिस की दिशा ही बदल दें। आध्यात्मिक गुरु संत नीम करोली बाबा के जीवन और शिक्षाओं पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की अप्रत्याशित सफलता यानी Hanuman Ansh Box Office Success इस समय फिल्म इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी केस स्टडी बन चुकी है। महज 10 लाख रुपये की मामूली ओपनिंग से सफर शुरू करने वाली इस फिल्म ने टिकट खिड़की पर 80 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर सबको चौंका दिया है।
इस महा-सफलता के बीच फिल्म की मेकिंग (Behind The Scenes) का एक बेहद दिलचस्प और भावुक कर देने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें डायरेक्टर खुद गांव-गांव घूमकर बैकग्राउंड क्राउड जुटाते नजर आ रहे हैं।
भारतीय सिनेमा, फिल्मों के वर्गीकरण और प्रसारण से जुड़े आधिकारिक मानकों की जानकारी के लिए आप Central Board of Film Certification (CBFC) के आधिकारिक पोर्टल पर नियम और दिशानिर्देश देख सकते हैं।
जब लाउडस्पीकर लेकर गांव की गलियों में निकले डायरेक्टर
इंटरनेट पर वायरल हो रहे बीटीएस वीडियो में दिख रहा है कि बजट की कमी के बावजूद फिल्म को बिल्कुल जमीनी और वास्तविक दिखाने के लिए मेकर्स ने कितनी मेहनत की।
वीडियो में फिल्म के लेखक और निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी हाथ में माइक थामे गांव की गलियों में घूमते हुए घोषणा करते नजर आते हैं:
“नमस्कार, सभी को राम-राम। आपके गांव में हम सब एक फिल्म का निर्माण कर रहे हैं। इस फिल्म के एक खास दृश्य के लिए हमें बुजुर्गों, बड़े-बूढ़ों की जरूरत है जो कुर्ता-पायजामा, धोती-कुर्ता और सदरी पहनकर आ सकें। यदि महिलाएं भी इसमें शामिल होना चाहें तो वे साड़ी पहनकर आ सकती हैं। यदि आप सफेद कुर्ता-पायजामा में आ सकते हैं तो शूटिंग का हिस्सा जरूर बनें।”
वीडियो में टीम के सदस्य गांव के बच्चों से भी पूछते दिखते हैं कि क्या उनके घर में कोई बुजुर्ग हैं जो इस सीन में खड़े हो सकें। इसी सादगी और स्थानीय लोगों के जुड़ाव ने पर्दे पर फिल्म के हर दृश्य को जीवंत बना दिया।
सेट पर लागू थे कड़े नियम, हनुमान चालीसा से हल होती थीं दिक्कतें
निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने हालिया साक्षात्कारों में खुलासा किया कि बाबा के जीवन पर आधारित होने के कारण फिल्म के सेट पर कुछ कड़े नियम बनाए गए थे:
शुद्ध सात्विक माहौल: सेट पर किसी को भी अपशब्द बोलने, तेज आवाज में झगड़ा करने, शराब पीने या मांसाहारी भोजन करने की सख्त मनाही थी। Hanuman Ansh
हनुमान चालीसा का पाठ: हर दिन की शूटिंग की शुरुआत और समाप्ति सामूहिक हनुमान चालीसा के पाठ के साथ की जाती थी। निर्देशक का मानना है कि प्रोडक्शन के दौरान आने वाली कई बड़ी तकनीकी और वित्तीय रुकावटें इसी आस्था के बल पर दूर हुईं।
भंडारा और सेवा भाव: प्रचार के लिए बजट न होने पर टीम ने बड़े मंगल के मौकों पर जगह-जगह भंडारे आयोजित कर प्रसाद बांटा और बाबा के ‘भूखों को भोजन कराने’ के संदेश को लोगों तक पहुंचाया।
25 स्क्रीन से 7,000 शोज तक का चमत्कारी सफर
7 अगस्त को रिलीज हुई इस फिल्म की शुरुआत बेहद धीमी रही थी और पहले दो हफ्तों में यह महज 40 लाख रुपये ही बटोर सकी थी। एक समय तो मल्टीप्लेक्सों ने इसके शो घटाकर केवल 25 से 29 तक सीमित कर दिए थे।
लेकिन तीसरे हफ्ते में जैसे ही दर्शकों की ‘माउथ पब्लिसिटी’ (Word of Mouth) शुरू हुई, सिनेमाघरों में अप्रत्याशित भीड़ उमड़ पड़ी। बड़े शहरों से लेकर कस्बों और गांवों तक के थिएटर्स हाउसफुल होने लगे। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्ममेकर मधुर भंडारकर समेत कई दिग्गजों ने इसे ‘प्योर सिनेमैटिक मैजिक’ बताते हुए पूरी इंडस्ट्री के लिए एक मिसाल करार दिया है।
( Hanuman Ansh ) निष्कर्ष:-
शोभिनव सत्या द्वारा अभिनीत ‘हनु मान अंश’ की यह कहानी साबित करती है कि सिनेमा में करोड़ों के वीएफएक्स और महंगे पीआर से कहीं ज्यादा ताकत सच्ची भावना, आस्था और ईमानदार कहानी में होती है। गांव की मिट्टी से उपजी यह फिल्म आज बॉक्स ऑफिस पर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है।











