Climate Dynamics Conference Key Highlights (प्रमुख बिंदु)
160 गीगावाट सौर क्षमता: 12 साल में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 2 गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट से अधिक हो गई है।
प्रति व्यक्ति उत्सर्जन कम: भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधा और विकसित देशों से 6 गुना कम है।
50 लाख घरों में सोलर: ‘पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत 50 लाख से अधिक घरों में छत पर सोलर पैनल लगे हैं।
पहली हाइड्रोजन ट्रेन: भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई, जो दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को विज्ञान भवन में आयोजित ‘The Future of Environment and Climate Dynamics’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस Climate Dynamics Conference में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 17 देशों के न्यायाधीश और प्रतिनिधि शामिल हुए। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में भारत की जलवायु पहलों, सौर ऊर्जा विस्तार और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा करने पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया को न केवल दिशा दिखा रहा है, बल्कि जलवायु चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान भी प्रदान कर रहा है।
सम्मेलन और भारत की जलवायु नीतियों से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए आप पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार की वेबसाइट देख सकते हैं।
Climate Dynamics Conference: पीएम मोदी के प्रमुख ऐलान
सौर ऊर्जा में अभूतपूर्व वृद्धि: पीएम मोदी ने बताया कि 12 साल पहले देश की सौर क्षमता केवल 2 गीगावाट थी, जो आज 160 गीगावाट से अधिक हो चुकी है।
पीएम सूर्यघर योजना: इस योजना के तहत अब तक 50 लाख से अधिक घरों में सोलर पैनल लगाए जा चुके हैं, प्रत्येक परिवार को लगभग 80,000 रुपये की सहायता दी गई है।
हाइड्रोजन ट्रेन का जिक्र: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जो जिंद-सोनीपत सेक्शन पर चल रही है, को दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन बताया गया।
NGT मोबाइल ऐप लॉन्च: सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का मोबाइल ऐप लॉन्च किया, जो नागरिकों को NGT से जुड़ी जानकारी और सेवाएं प्रदान करेगा।
भारत की जलवायु उपलब्धियां: आंकड़ों में प्रगति
क्षेत्र 2014 (लगभग) 2026 (वर्तमान) वृद्धि सौर ऊर्जा क्षमता 2 गीगावाट 160+ गीगावाट 80 गुना पवन ऊर्जा क्षमता आधार स्तर 3 गुना वृद्धि 300% गैर-जीवाश्म ऊर्जा आधार स्तर 400% वृद्धि 400% इलेक्ट्रिक वाहन बिक्री 3,000/वर्ष 25 लाख/वर्ष 833 गुना मेट्रो नेटवर्क 5 शहर, 250 किमी 20+ शहर, 1000+ किमी 4 गुना अमृत सरोवर – 70,000+ नया पवन ऊर्जा: बीते 12 वर्षों में देश की पवन ऊर्जा क्षमता में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है।
परमाणु ऊर्जा लक्ष्य: भारत ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इलेक्ट्रिक वाहन: 2014 से पहले सालाना केवल 3,000 इलेक्ट्रिक वाहन बिकते थे, जबकि पिछले साल 25 लाख वाहन बिके।
मेट्रो विस्तार: 2014 से पहले केवल 5 शहरों में 250 किमी से कम मेट्रो नेटवर्क था, आज 20 से अधिक शहरों में 1,000 किमी से अधिक नेटवर्क संचालित है।(Climate Dynamics Conference)
जल संरक्षण और कृषि सुधार: हरित भारत की ओर
70,000 अमृत सरोवर: देश भर में 70,000 से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण किया गया है, जो जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
कैच द रेन अभियान: इस अभियान के तहत लगभग 1.5 करोड़ जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं।
प्राकृतिक खेती मिशन: 12.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के क्लस्टर बनाए गए हैं, और 3,000 फसलों की किस्में मौसम परिवर्तन को झेलने में सक्षम बनाई गई हैं।
वन आवरण में वृद्धि: पिछले 12 वर्षों में देश के अति सघन वन क्षेत्र (Very Dense Forest Cover) में 22% की वृद्धि हुई है।
Plastic Ban और Circular Economy: कचरे से संसाधन तक
सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक: भारत ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक लगाई है और ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल’ के मंत्र के साथ सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
गोबरधन योजना: गांवों में गोबर और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलने के लिए गोबरधन योजना लागू की गई है।
रोजाना रीसायकलिंग: आज भारत में हजारों टन कचरा रोजाना रीसायकल किया जा रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
(पीएम मोदी के इस संबोधन ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर केवल वादे नहीं, बल्कि ठोस कार्यों और मापने योग्य परिणामों के साथ आगे बढ़ रहा है। सौर ऊर्जा में 80 गुना वृद्धि, हाइड्रोजन ट्रेन जैसी नवीन तकनीकें, और 50 लाख घरों में सोलर पैनल जैसे आंकड़े भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। आने वाले वर्षों में 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा और 2070 तक नेट-जीरो के लक्ष्य को पूरा करना भारत के लिए चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन वर्तमान गति और दिशा को देखते हुए यह लक्ष्य प्राप्त करने योग्य प्रतीत होता है।(Climate Dynamics Conference)










