Onion Price Hike Key Highlights (प्रमुख बिंदु)
94% की छलांग: 16 सितंबर को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 53.84 रुपये किलो रहा, जो एक साल पहले 27.71 रुपये था।indiatoday+1
सरकारी vs खुला बाजार: सरकार 35 रुपये किलो में बफर स्टॉक बेच रही है, लेकिन आम उपभोक्ता को 60-70 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।thefederal+1
19 शहरों में सप्लाई: ‘कांदा एक्सप्रेस’ सहित रेल और सड़क मार्ग से 19 शहरों तक बफर प्याज पहुंचाया जा रहा है।thefederal+1
खरीफ फसल में देरी: महाराष्ट्र और कर्नाटक में बुआई 15 दिन पीछे, जिससे नई फसल की आवक में देरी का खतरा बना है|
नई दिल्ली:
रसोई की शान प्याज ने फिर से आम आदमी की आंखों में आंसू ला दिए हैं। Onion Price Hike के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में प्याज की कीमतें एक साल में लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। केंद्र सरकार ने कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 24 अगस्त से बफर स्टॉक से 35 रुपये किलो की दर से प्याज बेचना शुरू किया, लेकिन खुले बाजार में यह 60 से 70 रुपये किलो तक बिक रही है। उपभोक्ता मामलों के आंकड़े बताते हैं कि थोक भाव में हाल के दिनों में गिरावट आई है, जिससे खुदरा दरों में भी राहत की उम्मीद जताई गई है।
प्याज की कीमतों और बफर स्टॉक से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए आप उपभोक्ता मामले विभाग, भारत सरकार की वेबसाइट देख सकते हैं।
Onion Price Hike: आंकड़ों में महंगाई का सच
खुदरा कीमतें: 16 सितंबर 2026 को देश में प्याज का औसत खुदरा भाव 53.84 रुपये किलो दर्ज किया गया।indiatoday+1
वार्षिक वृद्धि: यह कीमत एक साल पहले के 27.71 रुपये किलो से लगभग 94% अधिक है।indiatoday+1
मासिक वृद्धि: पिछले एक महीने में भी कीमतों में 48% की तेजी देखी गई है।kisantak+1
- थोक बाजार: थोक भाव में पिछले नौ दिनों में 9% की गिरावट आई है, जो राहत का संकेत है।
| मापदंड | कीमत/प्रतिशत |
|---|---|
| औसत खुदरा भाव (16 सितंबर) | 53.84 रुपये/किलो |
| एक साल पहले (16 सितंबर 2025) | 27.71 रुपये/किलो |
| वार्षिक वृद्धि | 94% |
| मासिक वृद्धि | 48% |
| थोक भाव में गिरावट (9 दिन) | 9% |
| सरकारी बफर विक्रय दर | 35 रुपये/किलो |
सरकार का बफर स्टॉक प्लान: क्यों नहीं मिल रहा फायदा?
बफर स्टॉक की मात्रा: सरकार ने 2026-27 के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार किया है।thefederal+2
विक्रय दर: NAFED, NCCF, केंद्रीय भंडार और मोबाइल वैन के जरिए 35 रुपये किलो की दर से बिक्री हो रही है।thefederal+1
सीमित पहुंच: अब तक केवल 17-19 शहरों में ही यह व्यवस्था लागू है, जिससे हर उपभोक्ता तक राहत नहीं पहुंच पा रही।thefederal+2
कांदा एक्सप्रेस: उत्पादक राज्यों से बड़े खपत केंद्रों तक प्याज पहुंचाने के लिए रेल रैक और 30 से ज्यादा ट्रकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।thefederal+1
खरीफ फसल में देरी और मौसम की मार
बुआई में पिछड़ापन: महाराष्ट्र के नासिक में खरीफ प्याज की बुआई 15 दिन पीछे चल रही है।
कर्नाटक की स्थिति: चित्रदुर्ग-चलकेरे इलाके में बुआई सामान्य स्तर की 60% ही दर्ज की गई है।
रबी स्टॉक की कमी: रबी सीजन का स्टॉक धीरे-धीरे खत्म हो रहा है, जबकि नई खरीफ फसल बाजार में आने में समय लेगी।thefederal+1
मौसम का असर: मानसून में देरी और असमय बारिश ने रबी फसल को नुकसान पहुंचाया, जिससे स्टॉक पर दबाव बढ़ा।deccanchronicle+2
Onion Price Hike: क्या है भविष्य का अनुमान?
थोक भाव में गिरावट: थोक बाजार में कीमतों में 9% की गिरावट से खुदरा दरों में भी कमी की उम्मीद है।kisantak+2
खरीफ आवक: नई खरीफ फसल मिड-अक्टूबर से मंडियों में पहुंचने की उम्मीद है, जिससे कीमतों में स्थिरता आ सकती है।timesofindia.indiatimes+1
- सरकारी हस्तक्षेप: बफर स्टॉक की सप्लाई बढ़ाने और अधिक शहरों तक पहुंचाने से बाजार में राहत मिलने की संभावना है।
प्याज की कीमतों में आई यह तेजी सिर्फ मौसम और फसल चक्र का नतीजा नहीं, बल्कि आपूर्ति श्रृंखला में मौजूद खामियों को भी उजागर करती है। सरकार का बफर स्टॉक प्लान सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन इसकी पहुंच को व्यापक बनाना और खरीफ फसल की समय पर आवक सुनिश्चित करना ही असली राहत देगा। आने वाले हफ्तों में थोक भाव में गिरावट और नई फसल की आवक से कीमतों में स्थिरता की उम्मीद है, लेकिन तब तक आम उपभोक्ता को महंगाई के आंसू पीने पड़ सकते हैं।










